Thursday, December 13, 2012

Ajab Gajab


अलग  है  संसार हमारा 
भावनाओं का व्यापर है ।।

एक के पीछे कुछ शुन्य लगा दो
हर क्रीडा करने को तैयार है 

रूपया है भगवान् हमारा 
डॉलर  Jesus Christ है 

कौन मित्र और कौन शत्रु 
सब नोटों की fight है 

गहन विषय पर चर्चा कर बोले 
देश की अवगति स्वीकार नहीं 

किन्तु कार्य करने को 
बंधू  A /C बिना तैयार नहीं 

सबके सामने बोले भैया नारी हत्या पाप है 
ज़रा मुखोटा हटा के देखो ये काम देव के बाप है 

मरने मारने मई सब मग्न 
जीने की नियत कहा है 

हमारे विश्व के लिए हम पर्यत 
प्रलय की ज़रूरत कहा है